मन की उदासी
मन क्यों इस कदर उदास है ,
यह आदत है या, बात कुछ ख़ास है।
न जाने कैसा, अजीब सा एहसास है ,
और क्यों हो रहा यह आभास है।
नहीं आता मुझे कुछ भी रास है ,
अपना स्वभाव तो केवल मन का दास है।
क्या मुझसे दूर, क्या मेरे पास है ,
अपना हथियार तो केवल विश्वास है।
करता जब कोई निरंतर प्रयास है ,
बन जाता फिर वो काम, ख़ास है।
कैसा अनोखा यह जीवन का राज़ है ,
हर दिन ने छेड़ा एक नया साज़ है।
फिर भी मन में छुपी इक आस है ,
जो कहती है कि , डट कर चलना है जब तक इस शरीर में सांस है।
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