नदी सा जीवन

   

मुझे कुछ कहना है ,
नदी की तरह तेज़ बहना है,
उम्मीद का बनाया मैंने गहना है ,
विश्वास से सजाकर उसे पहना है। 

बाधाओं के पर्वतों को तोड़ते हुए ,
ग़म के पत्थरों से रुख मोड़ते हुए ,
सूरज की तपिश को सहना है ,
और बस आगे बढ़ते रहना है। 

विचारों के खेत में ,
नये अनुभवों की रेत में ,
तराई की मिट्टी को भिगोना है ,
जिसमें, नए साहस के बीजों को पिरोना है। 

जज़्बातों के उठते गुब्बार से ,
शांत मन के प्रभाव से ,
आत्मा को यूँ संजोना है ,
कि, प्रकृति के आनंद में खोना है। 

आगे धीमी गति से बढ़ते हुए ,
फैले हुए अंदाज़ों को समेटते हुए ,
समंदर की गेहराइयों में एक होना है ,
फिर सदा के लिए, चैन से सोना है।

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