बदलता समय


न जाने और कितनी मुश्किलों का डेरा आएगा,
चहकती धूप के बाद, बार-बार अँधेरा आएगा।

मन को फिर से यूँ उधेड़ा जाएगा,
विचारों को फिर से यूँ खदेड़ा जाएगा। 

संकटों का बादल घनेरा छाएगा,
पर ज्यादा समय तक टिक ना पाएगा। 

काली घनी रात के बाद फिर सवेरा आएगा,
जो मेरे पॉंव, फिर से जमाएगा। 

संयम-हौसला राह बताएगा,
विश्वास उसपे आगे बढ़ाएगा। 

क़ाबिलियत को बुलंदी पर पहुँचाएगा,
क्यूँकि,समय अब मेरा आएगा।। 

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